नोएडा:
अस्पतालों में इलाज न मिलने की वजह से एक 30 साल की गर्भवती महिला की मौत
हो गई। महिला का पति उसके इलाज के लिए 13 घंटे तक सड़कों पर भटकता रहा। इस
मामले में जांच समिति की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी ने जिला अस्पताल के मुख्य
चिकित्सका अधीक्षक समैत ईएसआई व निजी अस्पताल के कर्मचारियों पर कार्यवाही
करते हुए प्रमुख सचिव स्वास्थ्य व शासन के अधिनस्त अधिकारियों को पत्र लिखा
है। लॉकडाउन के दौरान इस कृत्य के लिए यह अब तक की बड़ी कार्यवाही मानी जा
रही है।
साथ ही जिला अस्पताल के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी से मरीज को रिसीव नहीं कराया गया। जांच में अस्पताल के निदेशक, उपचार व रैफर करने वाले चिकित्सक, एंबुलेंस के चालक को उत्तरदायी माना गया। जिलाधिकारी की ओर से इन कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवारही करने के लिए प्रमुख सचिव, श्रम उप्र शासन , सचिव , श्रम विभाग भारत सरकार नई दिल्ली, व डीजी राजकीय कर्मचारी , जीवन बीमा निगम लखनऊ को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है।
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वॉर्ड आया अनीता के खिलाफ कार्यवाही करने व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक वंदना शर्मा को ट्रांसफर करते हुए मुख्य चिकित्सका अधीक्षक के पद पर किसी योग्य चिकित्सा अधीक्षक की तैयाती के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया। इस प्रकरण में निजी अस्पतालों की ओर से बेड नहीं होने का बहाना बनाया गया। इस संबंधित में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सका अधिकारी को प्रकरण में लिप्त सभी निजी अस्पतालों के खिलाफ कारण बताओं नोटिस करने के निर्देश दिए। साथ ही उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में एक चिकित्सीय समिति गठित एफआईआर दर्ज की जाए।
अस्पताल की लापरवाही के चलते गई महिला की जान
दरअसल, खोड़ा निवासी नीलम की मौत समय पर इलाज नहीं मिलने से हुई थी। वह आठ माह की गर्भवति थी उसके साथ बच्चे ने भी दम तोड़ दिया था। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) व मुख्य चिकित्सकाधिकारी को जांच सौंपी। 72 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को पेश की गई। जांच में सेक्टर-24 ईएसआई अस्पताल नोएडा में सारी सुविधाएं व वेंटीलेटर की उपलब्धा के बावजूद पीड़िता का इलाज न करते हुए उसे जिम्स रेफर कर दिया। एंबुलेंस के जरिए पीड़िता को जिम्स न ले जाकर सेक्टर-30 जिला अस्पताल के बाहर छोड़ दिया गया।साथ ही जिला अस्पताल के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी से मरीज को रिसीव नहीं कराया गया। जांच में अस्पताल के निदेशक, उपचार व रैफर करने वाले चिकित्सक, एंबुलेंस के चालक को उत्तरदायी माना गया। जिलाधिकारी की ओर से इन कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवारही करने के लिए प्रमुख सचिव, श्रम उप्र शासन , सचिव , श्रम विभाग भारत सरकार नई दिल्ली, व डीजी राजकीय कर्मचारी , जीवन बीमा निगम लखनऊ को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है।
जिला अस्पताल के सीएमएस का किया जाए स्थानांतरण
जांच में पाया गया कि मरीज यदि जिला अस्पताल में इलाज योग्य नहीं है तो हायर सेंटर में उचित व्यवस्था के समन्वय बनाकर मरीज को रैफर किया जाना चाहिए था। यह निर्णय भी संविदाकार के जरिए नहीं बल्कि सक्षम अधिकारी की मौजूदगी में होना चाहिए। जांच में आया कि उक्त कर्मचारियों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को बिना बताए मरीज को वापस कर दिया गया। इस तरह की सूचना बार बार सामने आ रही है। साथ ही अस्पताल की सीएमएस को बार बार इसके प्रति बताया भी जा रहा है। जबकि महौल कोविड-19 का है। ऐसे में जिला अस्पताल में कार्यरत स्टॉफ नर्स रोजबाला ,ये भी पढ़ें-
वॉर्ड आया अनीता के खिलाफ कार्यवाही करने व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक वंदना शर्मा को ट्रांसफर करते हुए मुख्य चिकित्सका अधीक्षक के पद पर किसी योग्य चिकित्सा अधीक्षक की तैयाती के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया। इस प्रकरण में निजी अस्पतालों की ओर से बेड नहीं होने का बहाना बनाया गया। इस संबंधित में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सका अधिकारी को प्रकरण में लिप्त सभी निजी अस्पतालों के खिलाफ कारण बताओं नोटिस करने के निर्देश दिए। साथ ही उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में एक चिकित्सीय समिति गठित एफआईआर दर्ज की जाए।



